पिंचिस का आर्केस्टा🎺🎷🎶🎵🎼

पंकज खन्ना
9424810575


मेरा बचपन का प्रिय दोस्त पिंचिस (मतलब Plier या Pincer) उमर में पांच छह साल छोटा है लेकिन सब बिगड़ते काम  ठीक कर देता है। जरूरत पड़ने पर लोगों के काम भी लगा देता है! इसलिए उसे पिंचिस कहते हैं। पिंचिस ठेठ मालवी तबियत का है। 'श' को 'स' और 'ज' को 'च' बोलता है। पंकज नहीं पंकच भिया बोलता है! 'रहा' नहीं 'रिया' बोलेगा। 'ही' नहीं 'ई' बोलेगा।

लेकिन कभी-कभी ये मेरा भी ताऊ बन जाता है। एक महीने से मेरे पीछे पड़ गया है कि एक बार वो भी ब्लॉग लिखेगा, और इसी अकाउंट से! 

               (मालवा का ठिलवा- पिंचिस)

बचने की कोई पतली गली नहीं बची है। उसका लिखा लगाना ही पड़ेगा। वो थोड़ा टेढ़ा और जाड़ा है इसलिए उसका संदेश भी नीचे बिल्कुल टेढ़े और जाड़े फ़ॉन्ट में ही रखा है:👇

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भिया के ब्लॉग के पाठकों को संदेस पिंचिस का।

भिया और भेंजी लोग, 
जै सिरि राम!🙏💐🙏

अपन का  मोहल्ले का नाम पिंचिस है। पंकच भिया के खासम-खास दोस्तों  में से एक हैं। भंडारा चलाने के अलावा अपना काम लोगों को टाइट करना है, बिल्कुल पिंचिस के समान।  पिंचिस  मतलब  पिलायर । अपने से मुजोरी नी करना ,क्या? अच्छों-अच्छों के टेंटुए टाइट कर रखे हैं अपन ने भिया के लिए। ऐसे ई पिंचिस नी बोलते हैं अपन को!

पंकच भिया मतलब  वोई आपके  बिलाग वाले भिया। हमारे लिए पारसी मोहल्ले वाले भिया। कुछ के लिए HPCL वाले। बहुतों के लिए  GSTI वाले। छोरे छोरियों  के लिए T.I.M.E./IMS  वाले। फिरंगियों के लिए  पुराने इंजन वाले भिया। भिया हर जगह टांग फसा के बैठे हैं! 

लेकिन मोहल्ले के लिए ई  टेम नी हे इनके कने! फोन करो तो केन लगते हैं: गाने सुन रिया हूं। अभी बिलाग लिख रिया हूं। कनकौए का साग बना रिया हूं। पढ़ रिया हूं!

कालेच में थे तो पढ़ाई की नी। दोस्त ओन के साथ  मोहल्ले भर में आवारागर्दी करते रेते थे। हम इस्कूल से देखते रेते थे। तब पढ़ाई कर ली होती इनने  तो  कुछ बन गए होते। अब बुढ़ापे में पढ़ाई का सोक लग रिया हे इनकू।

कुछ बोलो तो केन लगते हैं : पिंचिस तू चुप बैठ!

भिया थोड़ा सा सटके हुए तो पहले भी थे। लेकिन रिटायर होने के बाद थोड़ा और सटक गए हैं। बिलोगर बन गए हैं। दे बिलाग पे बिलाग!  दे बिलाग पे बिलाग!! हर हफ्ते पूछने लगते हैं: क्यों  रे पिंचिस कैसा लिखा रे बिलाग!? क्या बोलें अपन!? पढ़ भी लेंगे तो कौनसा समझ आ रिया है अपने कू!? फोटो ओन देखके बिना पढ़े येई बोल देते हैं अपन: 

'एक लंबर भियाओ!'
'छा गए भिया!'
'पूनम सिंधन भी खुस हो गई! याद कर रई थी!'
'अनारकली के आंसू नी थम रे!'
'भिया आपका बिलोगर ऑफ द ईयर का इनाम नक्की!

भोत झूठ बुलवाते हैं भिया!

अरे भिया ने लिखा है तो अच्छा ही लिखा होगा ना!?मान लिया! पर मुझे ये बताओ  कि मोहल्ले में पढ़ कौन रिया है ये बिलाग!? येई बात भिया के संपट नी बैठ री हे। लिखे जा रिए हैं। लिखते भी हैं तो किस के बारे में? गौहर जान, काली जान, रहमू जान, तमंचा जान, निगार सुल्ताना!

जमाना जेट पे जा रिया हे पर ये साइकिल पे ई चलेज्जारे हैं ,चलेज्जारे हैं ! कभी रेल पकड़ लेते हैं तो इंजन की सीटी मारते रेते हैं। और फिर लगातार ज्ञान गणित भी देते रेते हैं। अरे कईं समझ में आ रिया हे क्या ये सब अपन को!?

और खाने में क्या खिला रिए हैं!? पोई, गुडरी, कनकौआ और पता नी क्या-क्या भलते-भलते आईटम! पढ़ के ई दस्त लग गए थे अपन को तो! उज्जैन वाली जिज्जी सई केती हैं। भिया भोत डामीस हैं!

आप लोग भी पक गए होंगे इनके बिलाग होन से। तो बोलते क्यों नी हो इनको!? हमारी तो एक नी सुनते हैं। इनको कब से के रिया हूं  कि छोड़ो  ये बिलाग विलाग। अपन बैंड बनाएंगे! लोगों का बैंड बजा देंगे। यू ट्यूब पर झांकी जमा देंगे अलग! जवाब ई नी देरे !

क्या बताऊं आपको, भिया भोत सई किस्से सुनाते हैं। सब लौंडे जमीन पर बैठ जाते हैं इनके किस्से सुनने के लिए। अब हमारे कने न तो टेम ओर न अकल हे कि इनके  बिलाग पढ़ने लग जाएं। बस यू ट्यूब पर  किस्से सुन सकते हैं इनके! और वो सुना नी रे हैं।

भिया अगर अपने कानी-किस्से यू ट्यूब पर  सुनाने सुरु कर  दें तो पूरा सहर गाने ओर चिल्लाने  लगेगा: पंकच भिया!पंकच भिया!!पंकच भिया !!! चार-पांच ऊंची आवाजें तो ऐसी भी  निकलेंगी: पंकच पिया!पंकच पिया!!पंकच पिया !!!

ये आखरी वाली बात भौजी तक पोंचनी ही चीए! भोत खुस हो जाएंगी ! अपन को कबसे भिया के लिए के रई हैं : "ए लेके जाओ  रे इसको!" उनकी भी जान छूटे!! बाकी लुगइयां भी देख लें  कैसे एब्ले  हो गए हैं उनके पंकच पिया!

मेंने तो किसोर भिया से बात भी कर ली हे। अरे वोइ इन्दोरी किसोर भिया जिनके गाने वायरल होते रेते हैं। भोत बड़े आदमी हैं। ऐं, आपने उनका गाना ही  नी सुना!? कैसे सूम सटके में ज़िंदगी काट रे हो भिया यार!

किसोर भिया बोले तुम्हारे बैंड में गाने के बस दो लाख रुपैये दे सकता हूं। अपन ने के दिया हमारे बैंड में गाना हे तो दस लाख लगेंगे। सोच में पढ़े हुए हैं!  भोत खुजली हे उनको गाने की। उनकी तरफ से माल अई गया समझो। बाकी बचे सौ दो सौ रुपैये तो बड़े दिल वाले पंकच भिया दे ही देंगे! इतनी ही औकात हे इनकी! लेकिन काम हो जाएगा! पिंचिस हे ना! स्टूडियो बन जाएगा!

नी , अब तो यू ट्यूब पर वीडियो ही लगेंगे! कोई बिलाग विलाग नी। भोत हो गया। अब पिंचिस भंडारा नी  बल्कि आर्केस्टा चलाएगा और पंकच भियाओ  किस्से सुनाएंगे ,मालवी हिंदी में गाना भी गाएंगे। अरे आपको मालम नी है पंकच भिया एक नंबर के गवैए हैं! किसोर भिया भी पानी भरते हैं इनके आगे! 

इनका तो मुजरा भी  एक  लंबर होता था। एक बार  बचपन में  26 जनवरी को पारसी मोहल्ले केे  सांसकरीत  कारकिरम में  इन्ने 'नजर लागी राजा तोरे बंगले पर' वाले गाने पर मुजरा किया था। आग लग गई थी मोहल्ले में!  सुरेन चोर और नरेन नाई ने बहुत चवन्नियां लुटाई  थीं। कम्मो दद्दी आज भी याद करती हे ये मुजरा! वो  किस्सा सुनाती हैं तो उनके आगे के चार दांत हिल-हिल के रोते हैं! भिया एक बार ओर मुजरा दिखा दें तो कम्मो दद्दी भी  निकल्ले बैकुंठ, सांती से!

आप लोग बोल दो भिया को अपना ज्ञान गणित भर लें अपने ई सरीर में या दिमाग में! अब बिलाग नी बस पिंचिस का आर्केस्टा चलेगा!

आप ही सोचो कैसा रहेगा बैंड का ये नाम: मालवा का ठिलवा बैंड! ऐसा लग रिया ए कि अब्बी सुरु कर दूं ये बैंड बाजा। लेकिन  अब्बी तो जा रिया  हूँ, भंडारा लगवाना हे! बाद में करते हैं  भिया का पिरोगिराम !

भिया राम, भेंजी राम!🙏🙏

आपका 

 पिंचिस पानेवाला

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So this is how Pinchis chips in with his precious wisdom worth two cents! हलकट!


पिंचिस पगला गया है, पाने पिंचिस लहराकर नाच रहा है। तो क्या हम भी पगला जाएं!? ब्लॉगिंग छोड़कर  मुजरा गाने लग जाएं!? कुक्कू स्टाइल में कैबरे करने लग जाएं!? आप तो जानते ही हो हम बहुत धीर गंभीर टाइप के ब्लॉगर हैं और हमें ऐसे हंसी ठठ्ठे बिल्कुल पसंद नहीं हैं!

ब्लॉग्स ही चलने देते हैं अभी तो! साइकल संगीत का अगला एपिसोड ( ए मोहब्बत उनसे मिलने का बहाना  बन गया) भी लगा दिया है। चाहें तो लगे हाथ उसे भी पढ़ लें।

पिंचिस का आर्केस्टा चलेगा या नहीं, कुछ पता नहीं! पर इतना जरूर कह सकते हैं  कि इस ठिए पर मालवी  ठिलवाई जोर-शोर से चलती रहेगी!



पंकज खन्ना
9424810575

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मेरे कुछ अन्य ब्लॉग:

हिन्दी में:

तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
रेल संगीत: रेल और रेल पर बने हिंदी गानों के बारे में।
साइकल संगीत: साइकल पर आधारित हिंदी गाने।
तवा भाजी: वन्य भाजियों को बनाने की विधियां!
ईक्षक इंदौरी: इंदौर के पर्यटक स्थल। (लेखन जारी है।)

अंग्रेजी में:

Love Thy Numbers : गणित में रुचि रखने वालों के लिए।
Epeolatry: अंग्रेजी भाषा में रुचि रखने वालों के लिए।
CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
Corruption in Oil Companies: HPCL के बारे में जहां 1984 से 2007 तक काम किया।

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